US Green Card Changes: अमेरिका में ग्रीन कार्ड हमेशा से ही विवादों में रहा है, क्योंकि यहां एक बड़ी आबादी ऐसी है, जो मानती है कि विदेशी वर्कर्स और उनके परिवारों को स्थायी रूप से रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिका में ग्रीन कार्ड के जरिए विदेशी वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंट (PR ) के तौर पर रहने की इजाजत मिलती है। अमेरिका के कॉमर्स मंत्री हावर्ड लुटनिक ने कहा है कि वह H-1B वीजा में बदलाव तो करने ही वाले हैं, लेकिन साथ ही साथ ग्रीन कार्ड में भी बदलाव किया जाएगा।
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H-1B वीजा भारतीयों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि वे इसके जरिएअमेरिकी टेक कंपनियों में काम करने जाते हैं। उनके लिए ग्रीन कार्ड भी जरूरी होता है, क्योंकि इसके मिलने के बाद वह बिना H-1B वीजा के परमानेंट रेजिडेंट बनकर किसी भी कंपनी में जॉब कर सकते हैं। ग्रीन कार्ड को लेकर खड़े हुए विवाद के पीछे की वजह इसकी सैलरी है। अमेरिकी नेताओं का कहना है कि ऐसे लोगों को क्यों बसने दिया जा रहा है, जिनकी सैलरी कम है। वे देश की अर्थव्यवस्था में ज्यादा योगदान भी नहीं दे सकते हैं।
ग्रीन कार्ड होल्डर्स की सैलरी कितनी है?
अब यहां सवाल उठता है कि ग्रीन कार्ड होल्डर्स सालाना कितना पैसा कमा रहे हैं? इस सवाल का जवाब खुद ग्रीन कार्ड प्रोसेस में बदलाव की मांग करने वाले मंत्री हावर्ड लुटनिक ने दिया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं, हम ग्रीन कार्ड देते हैं। औसतन एक अमेरिकी 75000 डॉलर (लगभग 66 लाख रुपये) कमाता है और ग्रीन कार्ड पाने वाला शख्स सालाना 66,000 डॉलर (लगभग 58 लाख रुपये) कमा रहा है। इसलिए हम सबसे कम सैलरी वाले लोग को ग्रीन कार्ड दे रहे हैं, ऐसा क्यों हो रहा है?'
हार्वर्ड ने आगे कहा, 'यही वजह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार इसे बदलने वाली है। तभी गोल्ड कार्ड लाया जा रहा है। हम लोग सिर्फ अच्छे लोगों को चुनना शुरू करेंगे, ताकि वे ही देश में आ पाएं। अब इसे बदलने का समय आ चुका है।' ट्रंप ने कुछ महीने पहले ऐलान किया था कि वह गोल्ड कार्ड लेकर आएंगे। इस कार्ड के जरिए अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का ऑप्शन मिलेगा। ये सुविधा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो 5 मिलियन डॉलर खर्च कर ये गोल्ड कार्ड खरीदेंगे।
ग्रीन कार्ड होल्डर्स की कम सैलरी की वजह क्या है?
बहुत से लोगों को मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि ग्रीन कार्ड होल्डर्स एक औसत अमेरिका से कम सैलरी क्यों पा रहे हैं। इसे समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि ग्रीन कार्ड सिर्फ वर्कर को ही नहीं मिलता है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों को भी दिया जाता है। अमेरिका में बहुत से ऐसे लोगों के पास भी ग्रीन कार्ड है, जो काफी कम पैसा कमा रहे हैं। वे छोटी-मोटी जॉब करते हैं, जैसे वेटर, ड्राइवर, क्लीनर आदि। इस नौकरियों में सैलरी कम है, जिससे औसत सैलरी निकालने पर वेतन कम हो जाता है।
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H-1B वीजा भारतीयों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि वे इसके जरिएअमेरिकी टेक कंपनियों में काम करने जाते हैं। उनके लिए ग्रीन कार्ड भी जरूरी होता है, क्योंकि इसके मिलने के बाद वह बिना H-1B वीजा के परमानेंट रेजिडेंट बनकर किसी भी कंपनी में जॉब कर सकते हैं। ग्रीन कार्ड को लेकर खड़े हुए विवाद के पीछे की वजह इसकी सैलरी है। अमेरिकी नेताओं का कहना है कि ऐसे लोगों को क्यों बसने दिया जा रहा है, जिनकी सैलरी कम है। वे देश की अर्थव्यवस्था में ज्यादा योगदान भी नहीं दे सकते हैं।
ग्रीन कार्ड होल्डर्स की सैलरी कितनी है?
अब यहां सवाल उठता है कि ग्रीन कार्ड होल्डर्स सालाना कितना पैसा कमा रहे हैं? इस सवाल का जवाब खुद ग्रीन कार्ड प्रोसेस में बदलाव की मांग करने वाले मंत्री हावर्ड लुटनिक ने दिया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं, हम ग्रीन कार्ड देते हैं। औसतन एक अमेरिकी 75000 डॉलर (लगभग 66 लाख रुपये) कमाता है और ग्रीन कार्ड पाने वाला शख्स सालाना 66,000 डॉलर (लगभग 58 लाख रुपये) कमा रहा है। इसलिए हम सबसे कम सैलरी वाले लोग को ग्रीन कार्ड दे रहे हैं, ऐसा क्यों हो रहा है?'
हार्वर्ड ने आगे कहा, 'यही वजह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार इसे बदलने वाली है। तभी गोल्ड कार्ड लाया जा रहा है। हम लोग सिर्फ अच्छे लोगों को चुनना शुरू करेंगे, ताकि वे ही देश में आ पाएं। अब इसे बदलने का समय आ चुका है।' ट्रंप ने कुछ महीने पहले ऐलान किया था कि वह गोल्ड कार्ड लेकर आएंगे। इस कार्ड के जरिए अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का ऑप्शन मिलेगा। ये सुविधा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो 5 मिलियन डॉलर खर्च कर ये गोल्ड कार्ड खरीदेंगे।
ग्रीन कार्ड होल्डर्स की कम सैलरी की वजह क्या है?
बहुत से लोगों को मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि ग्रीन कार्ड होल्डर्स एक औसत अमेरिका से कम सैलरी क्यों पा रहे हैं। इसे समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि ग्रीन कार्ड सिर्फ वर्कर को ही नहीं मिलता है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों को भी दिया जाता है। अमेरिका में बहुत से ऐसे लोगों के पास भी ग्रीन कार्ड है, जो काफी कम पैसा कमा रहे हैं। वे छोटी-मोटी जॉब करते हैं, जैसे वेटर, ड्राइवर, क्लीनर आदि। इस नौकरियों में सैलरी कम है, जिससे औसत सैलरी निकालने पर वेतन कम हो जाता है।
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