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सोलापुर के 2 हज़ार करोड़ रुपये के इस उद्योग पर अमेरिकी ट्रेड वॉर ऐसे डाल रहा असर – ग्राउंड रिपोर्ट

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BBC सोलापुर के तौलिया उद्योग पर ट्रंप के टैरिफ़ का असर दिखने लगा है

सोलापुर की सभी कपड़ा मिलें बंद हो चुकी हैं. अब यहां केवल बड़े पैमाने पर तौलिए और चादरें तैयार की जाती हैं.

अमेरिका के लगाए गए 50% टैरिफ़ की वजह से इस उद्योग में काम करने वाले कम से कम पाँच हज़ार मज़दूरों पर एक-दो महीने में बेरोज़गारी का ख़तरा आ सकता है.

मज़दूर नेता और सीपीआई(एम) के पूर्व विधायक नरसय्या आडम मास्तर ने बीबीसी मराठी से बातचीत में ऐसा दावा किया है.

सोलापुर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के मुताबिक़ सोलापुर के कपड़ा उद्योग में लगभग 40 हज़ार मज़दूर काम करते हैं, जिनमें से 40% से ज़्यादा महिलाएं हैं.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ़ लगाए जाने के बाद, सोलापुर के टेरी टॉवेल उद्योग और इस क्षेत्र में काम करने वाले मज़दूरों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

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image BBC भारत के कपड़ा उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं

स्थानीय उद्यमियों ने बीबीसी मराठी से बातचीत में बताया है कि अमेरिका की घोषणा के बाद, सोलापुर से भेजे गए टेरी टॉवेल्स के कुछ कंटेनरों को रोक दिया गया है.

तिलोकचंद शाह सोलापुर स्थित 'कंसवा टेक्सटाइल्स' के मालिक हैं. वह टेरी टॉवेल्स सीधे अमेरिका को निर्यात करते हैं.

उन्होंने कहा, "मेरे कारख़ाने में हर महीने 50 टन उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 20 टन माल सीधे अमेरिका को निर्यात किया जाता है. हम हर तीन महीने में ऑर्डर भेजते हैं, हमें पहले से इनका ऑर्डर मिला होता है."

"लेकिन टैरिफ़ के कारण इस तिमाही के सारे ऑर्डर फिलहाल होल्ड पर हैं. हमने भी उत्पादन धीमा कर दिया है. साथ ही हम वैकल्पिक बाज़ार की तलाश कर रहे हैं. भारत के भीतर भी एक बड़ा बाज़ार है, और अब हम उस पर अधिक ध्यान दे रहे हैं."

रूस से कच्चे तेल के आयात के मुद्दे पर ट्रंप सरकार ने भारत पर पहले 25% और फिर अतिरिक्त 25% टैरिफ़ लगाया है. यानी 27 अगस्त से भारत पर कुल 50% टैरिफ़ लागू हो गया है.

वियतनाम, बांग्लादेश और पाकिस्तान से अमेरिका को भेजे जाने वाले टेरी टॉवेल्स की क़ीमतों की तुलना में अब ऊंची क़ीमतों की वजह से सोलापुर के टॉवेल्स के ग्राहक को बनाए रखना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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200 करोड़ रुपये के निर्यात को झटका image BBC

उदाहरण के तौर पर मान लें कि सोलापुर से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले एक तौलिए की क़ीमत 100 रुपये है. लेकिन 50% टैरिफ़ और अन्य टैक्स के कारण उसी तौलिए की क़ीमत 160 रुपये हो गई है. इसके विपरीत, अन्य देशों से अमेरिका को भेजे जाने वाले तौलिए सोलापुर के तौलिए की तुलना में सस्ते होंगे.

सोलापुर के चादर और टेरी टॉवेल्स को भारत सरकार से जीआई (जियोग्रैफ़िकल इंडिकेशन) टैग मिला हुआ है.

जीआई मान्यता उन उत्पादों को दी जाती है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में तैयार होते हैं. यह उनकी ख़ास गुणवत्ता और पहचान को मान्यता देना है.

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने बीबीसी से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय के कारण अमेरिकी ख़रीदार अब मेक्सिको, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ा सकते हैं.

सोलापुर शहर कई साल से कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है. एक समय था जब मुंबई के बाद महाराष्ट्र में सबसे अधिक कपड़ा मिलें सोलापुर में थीं.

यहां का मौसम और सस्ती मज़दूरी होने के कारण कपड़ा उद्योग को सोलापुर में ख़ूब बढ़ावा मिला था.

लेकिन बाद में सरकारी नीतियों और अत्यधिक श्रमिकों के कारण यहां के उद्योग दिवालिया होने लगे. सरकारी कपड़ा मिलों का घाटा बढ़ता गया. समय के साथ सोलापुर के वस्त्र उद्योग में गिरावट आने लगी.

आख़िर में अब यहां केवल सोलापुरी चादरें और तौलिए ही तैयार किए जाते हैं. यहां के तौलिए और चादरों का सालाना कारोबार क़रीब 2 हज़ार करोड़ रुपये का है.

इनमें से हर साल 800 से 900 करोड़ रुपये का निर्यात होता है, जिसमें से 20–25% निर्यात (क़रीब 200 करोड़ रुपये) केवल अमेरिका को होता है. लेकिन अब यह निर्यात प्रभावित होने वाला है.

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'हम मुश्किल समय में सरकार के साथ हैं' image BBC सोलापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजू राठी ने कहा है कि वो इस मुश्किल समय में केंद्र सरकार के साथ हैं

इस बीच सोलापुर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजू राठी और सोलापुर पावरलूम ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पेंटप्पा गद्दाम ने बीबीसी मराठी से कहा, "ऐसे मुश्किल समय में हम केंद्र सरकार के साथ हैं."

राजू राठी ने कहा, "देश में सबसे ज़्यादा रोज़गार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों में मिलता है. कपड़ा उद्योग इसी क्षेत्र में आता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र के विकास के लिए अच्छे प्रयास किए हैं."

"अब अमेरिका के फ़ैसले के बाद ऐसी उम्मीद है कि सरकार हमारी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान निकालेगी. इस अस्थायी संकट में हम केंद्र सरकार के साथ खड़े हैं."

रूस से बड़े पैमाने पर तेल ख़रीदने के कारण अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया है.

महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री जयकुमार गोरे ने बीबीसी मराठी से कहा, "भारत अमेरिका के दबाव में नहीं झुकेगा. अमेरिका के टैरिफ़ का भारत के कई उद्योगों पर असर पड़ा है, जो एक सच्चाई है. लेकिन सरकार सक्षम है."

"टैरिफ़ का जवाब कैसे देना है और जिनका नुक़सान हो रहा है, उनके बारे में सरकार विचार कर रही है. इस फ़ैसले को अभी ज़्यादा समय नहीं हुआ है. जल्द ही इस पर नीति घोषित की जा सकती है. साथ ही, अमेरिका के 50% टैरिफ़ का सामना करने की क्षमता भारत ने हासिल कर ली है."

उन्होंने कहा, "भारत अब दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. हमारी अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है. पहले जैसी स्थिति अब नहीं रही है, इसलिए ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है."

इस बीच, सोलापुर के कुल निर्यात के 20% निर्यात पर तत्काल असर पड़ा है, इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर समय रहते उपाय किए जाने चाहिए.

टैरिफ़ से होने वाले नुक़सान को थोड़ा कम करने के लिए सरकार ने कुछ उपायों की घोषणा की है, जैसे कच्चे माल पर आयात शुल्क को अस्थायी रूप से समाप्त करना.

साथ ही अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए बातचीत चल रही है, ताकि भारतीय उत्पाद को नए बाज़ार मिल सकें.

लेकिन कई लोगों का मानना है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं और इनके लिए पहले से ही प्रयास शुरू किए जाने चाहिए थे.

'अगर मज़दूर बेरोज़गार हुए तो आंदोलन करेंगे' image BBC नरसय्या आडम ने चेतावनी दी है कि मज़दूरों के बेरोज़गार होने पर वो आंदोलन करेंगे

नरसय्या आडम मास्तर का कहना है, "अमेरिका के टैरिफ़ का असर सोलापुर के मजदूरों पर सीधे पड़ने वाला है. इसलिए केंद्र सरकार इस पर क्या फ़ैसला लेती है, इसके लिए हम कुछ दिन इंतज़ार करेंगे. लेकिन अगर हमारे मज़दूरों पर बेरोज़गारी का संकट आया, तो हम ज़ोरदार आंदोलन करेंगे."

उन्होंने कहा, "सोलापुर से मुख्य रूप से अब टेरी टॉवेल्स का निर्यात होता है. जो कारख़ाने मुख्य रूप से अमेरिका को निर्यात करते हैं, वे अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में टिक नहीं पाएंगे. अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोलापुर के उद्योगों पर सीधा प्रहार किया है."

"केवल सोलापुर ही नहीं, बल्कि देशभर के मज़दूरों पर इसका असर होगा, इसलिए केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम मज़दूरों के मुद्दे पर जल्द ही बड़ा आंदोलन करेंगे."

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